November 20, 2009

Ek Sapno Ka Paudha


Attempting a poem in Hindi for the first time:

मन में एक छोटे बीज को लिए,
मिट्टी का एक टुकड़ा ढूंढ़ता हूँ,
शोणित से अपने सींचने के लिए,
मिट्टी एक टुकड़ा ढूंढता हूँ!

अस्थिर पगों पे उड़ रहा विचलित यौवन,
निरंतर संग्राम कर रहा क्रोधित मन,
तन मन को समर्पित करने के लिए,
मिट्टी का एक टुकड़ा ढूंढता हूँ!

बचपन की टूटी गलियों का दृश्य,
पिता की बलिदानों में मेरा भविष्य,
कुछ नए घर, नयी गलियों को मढने के लिए,
मिट्टी का एक टुकड़ा ढूंढता हूँ!

ह्रदय की ताबूत से सिसकियों ने आवाज दी,
देखो सपनो के रंग, जो अंधेरों में घुल गए,
उन्ही अंधेरों को कहीं दफ़नाने के लिए,
मिट्टी का एक टुकड़ा ढूंढता हूँ!